राज्य के जमशेदपुर में टाटा स्टील और बोकारो में सेल जैसे बड़े स्टील उद्योग एवं उनसे जुड़े सहायक उद्योग मौजूद हैं. विशाल आकार व मजबूत ढांचे के कारण झारखंड का स्टील क्षेत्र भारत के हरित विनिर्माण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
Clean Energy : झारखंड आज एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. पिछले कई दशकों से यह राज्य देश की कोयला व इस्पात आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार रहा है. अब जब यह देश स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है तथा नेट जीरो अर्थव्यवस्था की योजना बना रहा है, तब अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण झारखंड की भूमिका भविष्य के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
इस राज्य के पास विशाल खनन भूमि, बेहद मजबूत औद्योगिक ढांचा, स्टील उद्योग और धनबाद, बोकारो, रामगढ़ जैसे जिलों में फैले विराट औद्योगिक कॉरिडोर हैं, जो निश्चित रूप से उसे इस परिवर्तन की दिशा में बढ़ने का बड़ा अवसर प्रदान करते हैं. झारखंड की अर्थव्यवस्था में उद्योग और खनन का योगदान जहां 40 प्रतिशत से अधिक है, वहीं पहले से बड़ी संख्या में कुशल औद्योगिक श्रमिक भी इस राज्य में मौजूद हैं. इसलिए अब सवाल केवल यह नहीं है कि झारखंड परिस्थिति के अनुरूप बदलाव कर सकने में सक्षम है या नहीं, बल्कि अहम सवाल यह है कि आने वाले दिनों में यह बदलाव वह कितनी तेजी आैर सही योजना के साथ कर पाता है.
खनन के लंबे इतिहास के कारण झारखंड के पास इतनी जमीन उपलब्ध है, जितनी इस देश के बहुत कम ही औद्योगिक राज्यों के पास होगी. ऐसे में, राज्य की बंद और गैर-संचालित खानों की 11,000 हेक्टेयर से भी अधिक जमीन को हरित निवेश और यहां की अर्थव्यवस्था को विविध बनाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त, अगले पांच से दस वर्षों में लगभग 27,000 हेक्टेयर जमीन झारखंड को और भी उपलब्ध हो सकती है. यह काम केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा तय किये गये वैज्ञानिक खदान बंदी और भूमि पुनः उपयोग के नियमों के तहत किया जा सकता है.
इससे न केवल झारखंड में हरित निवेश आयेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होगा. यह जमीन रेलवे लाइनों, राष्ट्रीय राजमार्गों, बिजली ढांचे और जल स्रोतों के पास स्थित है, जो इसे और भी उपयोगी तथा अनुकूल बनाती है. सही योजना और बेहतर समन्वय के साथ इन क्षेत्रों का इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, हरित औद्योगिक क्षेत्र, स्वच्छ मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धित कृषि के लिए किया जा सकता है. इसी तरह धनबाद, बोकारो व रामगढ़ जैसे राज्य के जिले बिखरे हुए खनन क्षेत्रों की जगह एक जुड़े हुए हरित औद्योगिक कॉरिडोर का स्वरूप ले सकते हैं.
राज्य के जमशेदपुर में टाटा स्टील और बोकारो में सेल जैसे बड़े स्टील उद्योग एवं उनसे जुड़े सहायक उद्योग मौजूद हैं. विशाल आकार व मजबूत ढांचे के कारण झारखंड का स्टील क्षेत्र भारत के हरित विनिर्माण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, स्क्रैप के अधिक उपयोग, हाइड्रोजन के अनुकूल भट्ठियां लगाने और भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित स्टील उत्पादन के जरिये न केवल प्रदूषण को कम किया जा सकता है, बल्कि इससे व्यापार में बढ़त भी बनी रहेगी.
वर्ष 2050 तक जीवाश्म ईंधन को ग्रीन हाइड्रोजन से बदलना संभव है, खासकर अगर रिन्यूएबल एनर्जी को स्टील प्लांट्स के पास मौजूद खदानों की खाली जमीनों पर विकसित किया जाये. ऐसी को-लोकेशन से जहां बिजली की लागत कम होती है, वहीं विश्वसनीयता बढ़ती है और बदलाव से संबंधित जोखिम भी कम होते हैं. राज्य के आदित्यपुर-जमशेदपुर क्षेत्र में ऑटो व ऑटो-पार्ट्स बनाने वाली कई इकाइयां हैं, जिनमें से लगभग तीन-चौथाई माइक्रो और छोटे उद्यम हैं.
जैसे-जैसे देश इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह क्लस्टर इवी पार्ट्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, हल्के मटेरियल और आधुनिक विनिर्माण में आगे बढ़ सकता है. एमएसएमइ स्पेशल एक्जंपशन बिल, 2025 निरीक्षण को आसान बनाता है और नियमों का पालन सरल करता है. लेकिन, जाहिर है कि इसके साथ-साथ हरित वित्त तक पहुंच, तकनीक उन्नयन, इवी से जुड़े प्रशिक्षण और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियों से मजबूत जुड़ाव भी आवश्यक है.
झारखंड को एक स्पष्ट जस्ट ट्रांजिशन (जेटी) नीति की भी आवश्यकता है, जो मजबूत संस्थानों, स्थानीय स्तर की योजनाओं और कौशल विकास को बढ़ावा दे. साथ ही, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) का इस्तेमाल प्रशिक्षण, आजीविका और शिक्षा जैसे जस्ट ट्रांजिशन से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है. झारखंड के पास लगभग 17,000 करोड़ रुपये का डीएमएफटी कोष है, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा कोष है. धनबाद, बोकारो व रामगढ़ जैसे जिले कोयले के घटते भंडारों के बीच इन संसाधनों का सही इस्तेमाल कर सकते हैं. झारखंड का यह बदलाव उद्योग को छोड़ने नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने के बारे में है. यह रोजगार के नये अवसर पैदा करने की प्रक्रिया है. भूमि, उद्योग, श्रम और वित्त के बीच सही तालमेल के जरिये ही झारखंड अपनी खनन आधारित विरासत को भविष्य के लिए तैयार विकास के मंच में बदल सकता है. आवश्यकता सिर्फ नीतियों, निवेश और संस्थानों को सही दिशा में मोड़ने की है.